जालंधर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को करीब 2 करोड़ का एरियर बकाया नहीं दिया जा रहा। एरियर न मिलने की वजह से जवानों का रोष किसी भी समय टूट सकता है और जवान प्रदर्शन करने पर उतर सकते हैं। जवानों को छठे वेतनायोग के मुताबिक 1 जनवरी 2006 से बढ़े वेतन का एरियर दिया जाना था। इसे अभी तक जारी नहीं किया गया है। पूरे भारत के आरपीएफ जवानों को यह बकाया दिया जा चुके है। इसके साथ ही मंडल में भी आरपीएफ को छोड़ दूसरे रेल कर्मचारियों को बकाया दिया जा चुका है। इसके बावजूद जवानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
लंबी डयूटी, लेकिन बकाया नहीं
आरपीएफ जवानों ने कहा कि वह बकाया मिलने की लंबे समय से आस लगाए बैठे हैं। इसी आस के चलते वह घर के जरूरी सामान पर खर्च कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक बकाया नहीं दिया गया। इसके चलते वह अपना कर्ज ही नहीं उतार पा रहे। इसके लिए उन्हें भारी ब्याज भी चुकानी पड़ रही है।
बढ़े वेतन का मिलना था एरियर
आरपीएफ के करीब 400 जवानों का 2 करोड़ रुपए बकाया पड़ा है। छठे वेतनायोग के मुताबिक नई भर्ती वाले जवानों कम से कम 8460 रुपए दिए जाने थे। इसी के मुताबिक रेलवे की तरफ से 1 जनवरी 2006 से बढ़े वेतन को कागजों में बढ़ा दिया गया, लेकिन उन्हें अभी तक बकाया नहीं दिया गया। इसी तरह जवानों को 2008 से मोडिफाइड एश्योर कैरियर प्रोग्रेस स्कीम के तहत वेतन बढ़ाया गया था। यह वेतन उन जवानों की बढ़ाई गई थी, जिनका डयूटी समय 10 वर्ष से ज्यादा हो चुका है। यह बकाया भी जवानों को नहीं दिया गया। इनके अलावा मंडल के लांगरी का भी वेतन बढ़ा गया था, जिसे कम से कम 7400 रुपए किया गया था। इस तरह जवानों को बकाया राशि नहीं दी जा रही।
आरपीएफ एसोसिएशन भी कर चुकी हैं मांग
इस पूरे मामले के बारे में ऐसा नहीं कि अधिकारियों को जानकारी नहीं है। अधिकारियों को आरपीएफ एसोसिएशन की तरफ से कई बार ध्यान में लाया गया है। इसमें डिवीजनल रेल मैनेजर (डीआरएम), सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर (एस डीएससी) व सीनियर डिवीजन फाइनांस अधिकारी को भी पत्र लिखे जा चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की तरफ से जवानों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा।
देरी करने की जांच करवाई जाए
आरपीएफ एसोसिएशन के मंडल सचिव गुरदयाल सिंह ने कहा कि जवानों को बकाया राशि में देरी करने की वजह की उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए। इसके लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाए और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वह कई बार अधिकारियों से एरियर देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक बकाया नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि 25 जून तक अगर बकाया राशि न दी गई तो वे 26 जून से पूरे मंडल में आरपीएफ जवान मैस बायकाट करेंगे। कोई भी जवान मैस से खाना नहीं खाएगा।
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Monday, June 13, 2011
Gujrat Police: 8,500 हथियार रहित कॉन्स्टेबलों की नियुक्ति की जाएगी
अहमदाबाद। पिछले काफी समय से गुजरात का पुलिस विभाग पुलिसकर्मियों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन अब जल्द ही पुलिस विभाग की यह कमी पूरी होने जा रही है।
गुजरात सरकार ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर्स और कॉन्स्टेबल की 8 हजार से अधिक रिक्त पदों को भरने का निर्णय लिया है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 8,500 हथियार रहित कॉन्स्टेबलों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि ट्रेनिंग पूरी करने वाले 620 पीएसआई की अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग की जाएगी। प्रदेश के डीजीपी चितरंजन सिंह द्वारा यह सूचना जारी की गई है।
पुलिस स्टेशन का उद्घाटन करने वीरपुर आए सिंह ने बताया कि राज्य सरकार नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। इस उद्घाटन अवसर पर बॉर्डर रेंज के आईजी वी.एम. पारगी और राजकोट ग्रामीण के एस.पी.डी.एन पटेल भी उपस्थित थे।
गुजरात सरकार ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर्स और कॉन्स्टेबल की 8 हजार से अधिक रिक्त पदों को भरने का निर्णय लिया है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 8,500 हथियार रहित कॉन्स्टेबलों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि ट्रेनिंग पूरी करने वाले 620 पीएसआई की अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग की जाएगी। प्रदेश के डीजीपी चितरंजन सिंह द्वारा यह सूचना जारी की गई है।
पुलिस स्टेशन का उद्घाटन करने वीरपुर आए सिंह ने बताया कि राज्य सरकार नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। इस उद्घाटन अवसर पर बॉर्डर रेंज के आईजी वी.एम. पारगी और राजकोट ग्रामीण के एस.पी.डी.एन पटेल भी उपस्थित थे।
Gujrat Police: पुलिस ने मारा छापा तो विधवा ने कपड़े उतारने शुरू कर दिए
अहमदाबाद। शराब बेचने का व्यवसाय करने वाली एक विधवा के घर पर जब पुलिस ने छापा मारा तो विधवा ने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसकी इस हरकत से सकते में आई पुलिस उल्टे पांव वहां से भाग खड़ी हुई।
अहमदाबाद के छारानगर में अवैध शराब बेचने वालों के ठिकानों पर छापा मार कार्रवाई में अपनी पीठ थपथपाने वाली पुलिस को एक अजीब स्थिति का सामना कर पड़ गया। यहां पर एक विधवा बूटलेगर के घर पर पुलिस ने छापा मारा तो महिला ने पुलिस वालों के सामने ही अपने कपड़े फाड़ना शुरू कर दिए। माजरा देख पुलिस वालों के होश उड़ गए और उन्होंने यहां से भागने में ही अपनी भलाई समझी।
हालांकि विधवा महिला के अनुसार पुलिस वाले उसके यहां हफ्ता वसूलने गए थे। महिला के अनुसार पुलिस वालों ने उससे 5 हजार रुपए की मांग की थी, जब उसने इतने पैसे न होने की बात कहीं तो पुलिस वाले बिगड़ गए और उसके घर में तोड़फोड़ मचा दी। इधर पुलिस ने महिला की इस बात को पूरी तरह झूठ बताया है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कुबेरनगर के छारानगर में 10 दिन पहले डेप्यु. पुलिस कमिoAर, असि. पुलिस कमिश्नर और स्थानीय पुलिस ने छापामार कार्रवाई की थी। छापे की कार्रवाई के बाद भी छारानगर में कई लोग पुन: सक्रिय होकर अवैध रूप से शराब के व्यवसाय में लिप्त थे। इसीलिए मंगलवार को दोपहर के समय सरदारनगर पुलिस के अधिकारी ने अपनी टीम के साथ यहां पर छापा मारा। जब इस विधवा महिला के घर पर छापा मारा गया तो शुरूआती कुछ तू-तू-मैं-मैं के बाद महिला ने अपने कपड़े फाड़ना शुरू कर दिए। घटना से सकते में आई पूरी पुलिस की टीम वहां से भाग निकली।
अहमदाबाद के छारानगर में अवैध शराब बेचने वालों के ठिकानों पर छापा मार कार्रवाई में अपनी पीठ थपथपाने वाली पुलिस को एक अजीब स्थिति का सामना कर पड़ गया। यहां पर एक विधवा बूटलेगर के घर पर पुलिस ने छापा मारा तो महिला ने पुलिस वालों के सामने ही अपने कपड़े फाड़ना शुरू कर दिए। माजरा देख पुलिस वालों के होश उड़ गए और उन्होंने यहां से भागने में ही अपनी भलाई समझी।
हालांकि विधवा महिला के अनुसार पुलिस वाले उसके यहां हफ्ता वसूलने गए थे। महिला के अनुसार पुलिस वालों ने उससे 5 हजार रुपए की मांग की थी, जब उसने इतने पैसे न होने की बात कहीं तो पुलिस वाले बिगड़ गए और उसके घर में तोड़फोड़ मचा दी। इधर पुलिस ने महिला की इस बात को पूरी तरह झूठ बताया है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कुबेरनगर के छारानगर में 10 दिन पहले डेप्यु. पुलिस कमिoAर, असि. पुलिस कमिश्नर और स्थानीय पुलिस ने छापामार कार्रवाई की थी। छापे की कार्रवाई के बाद भी छारानगर में कई लोग पुन: सक्रिय होकर अवैध रूप से शराब के व्यवसाय में लिप्त थे। इसीलिए मंगलवार को दोपहर के समय सरदारनगर पुलिस के अधिकारी ने अपनी टीम के साथ यहां पर छापा मारा। जब इस विधवा महिला के घर पर छापा मारा गया तो शुरूआती कुछ तू-तू-मैं-मैं के बाद महिला ने अपने कपड़े फाड़ना शुरू कर दिए। घटना से सकते में आई पूरी पुलिस की टीम वहां से भाग निकली।
CG Police : एफआईआर दूर पावती तक नहीं
एफआईआर के बदले मिली पावती
खपरी निवासी विष्णु प्रसाद राजपूत के खेत में 5 एचपी का सबमर्सिबल पंप लगा था। 30 मई की रात चोरों ने खेत में लगा पंप चोरी कर लिया। पंप की कीमत करीब 35 हजार रुपए थी। अगले दिन सुबह चोरी का पता चलने पर वह हरि थाना पहुंचा।
उसने मामले में एफआईआर करने को कहा। पुलिस ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय उसे पावती थमा दी। इसके बाद दूसरे आवेदनों की तरह यह आवेदन भी रद्दी की टोकरी में चला गया। विष्णु राजपूत जब भी पुलिस से कार्रवाई के बारे में पूछता है तो यही कहा जाता है कि जांच चल रही है।
ट्रैक्टर चोरी, एफआईआर दूर पावती तक नहीं
हरि माइंस पर मेन रोड में ही झगर सिंह काठले का मकान है। 17 मार्च 2011 को उसने नया ट्रैक्टर और ट्राली खरीदी थी। तीन दिन बाद घर के सामने से रात में ट्रैक्टर-ट्राली चोरी हो गई।
अगली सुबह चोरी का पता चलते ही झगर सिंह थाने पहुंचा और घटना की जानकारी दी। पुलिस ने यह कहकर उसे लौटा दिया कि पहले वह आसपास ही तलाश करे, इसके बाद आकर जानकारी दे।
एक-दो दिन बाद फिर से थाना पहुंचा। पुलिस ने उससे आवदेन लिया लेकिन पावती नहीं दी। पिछले दो महीने से उसे तारीख देकर थाने बुलाकर वापस भेज दिया जाता है। झगर ने मामले को लेकर एसपी के पास जाने की बात कही थी। पुलिस वालों ने उसे ऐसा न करने की हिदायत दी और ट्रैक्टर खोज निकालने का दावा किया। झगर को अगली 10 तारीख को फिर से थाना बुलाया गया है।
खपरी निवासी विष्णु प्रसाद राजपूत के खेत में 5 एचपी का सबमर्सिबल पंप लगा था। 30 मई की रात चोरों ने खेत में लगा पंप चोरी कर लिया। पंप की कीमत करीब 35 हजार रुपए थी। अगले दिन सुबह चोरी का पता चलने पर वह हरि थाना पहुंचा।
उसने मामले में एफआईआर करने को कहा। पुलिस ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय उसे पावती थमा दी। इसके बाद दूसरे आवेदनों की तरह यह आवेदन भी रद्दी की टोकरी में चला गया। विष्णु राजपूत जब भी पुलिस से कार्रवाई के बारे में पूछता है तो यही कहा जाता है कि जांच चल रही है।
ट्रैक्टर चोरी, एफआईआर दूर पावती तक नहीं
हरि माइंस पर मेन रोड में ही झगर सिंह काठले का मकान है। 17 मार्च 2011 को उसने नया ट्रैक्टर और ट्राली खरीदी थी। तीन दिन बाद घर के सामने से रात में ट्रैक्टर-ट्राली चोरी हो गई।
अगली सुबह चोरी का पता चलते ही झगर सिंह थाने पहुंचा और घटना की जानकारी दी। पुलिस ने यह कहकर उसे लौटा दिया कि पहले वह आसपास ही तलाश करे, इसके बाद आकर जानकारी दे।
एक-दो दिन बाद फिर से थाना पहुंचा। पुलिस ने उससे आवदेन लिया लेकिन पावती नहीं दी। पिछले दो महीने से उसे तारीख देकर थाने बुलाकर वापस भेज दिया जाता है। झगर ने मामले को लेकर एसपी के पास जाने की बात कही थी। पुलिस वालों ने उसे ऐसा न करने की हिदायत दी और ट्रैक्टर खोज निकालने का दावा किया। झगर को अगली 10 तारीख को फिर से थाना बुलाया गया है।
CG Police : पुलिस ने कहा, पंप का नंबर लाओ
गांव के ही पूनाराम राजपूत के खेत से सबमर्सिबल पंप की चोरी हुई। थाने में कहा गया कि पहले पंप का नंबर लाओ, फिर एफआईआर होगी। पूनाराम आज तक नहीं समझ पाया कि पंप का नंबर क्या होता है। इसी प्रकार टिबलू के खेत से पैनल बोर्ड और भागवत के खेत से पंप का पाइप चोरी हो गया।
वे भी शिकायत लेकर थाने पहुंचे लेकिन न तो एफआईआर ही हुई और न ही आवेदन लिया गया। इसी तरह के कई पंप चोरी के मामले क्षेत्र में हो चुके हैं, जिसमें एफआईआर नहीं ली जा रही। इसी तरह चोरी के मामलों में प्रार्थी को पावती देकर वापस भेज दिया जाता है।
वे भी शिकायत लेकर थाने पहुंचे लेकिन न तो एफआईआर ही हुई और न ही आवेदन लिया गया। इसी तरह के कई पंप चोरी के मामले क्षेत्र में हो चुके हैं, जिसमें एफआईआर नहीं ली जा रही। इसी तरह चोरी के मामलों में प्रार्थी को पावती देकर वापस भेज दिया जाता है।
CG Police : bilaspur: ना खाता ना बही जो थानेदार कहें, वहीं सही
बिलासपुर.पुलिस विभाग का समाज से जुड़ने का दावा खोखला साबित हो रहा है। एक तरफ आला अधिकारी हर मीटिंग में आम व्यक्ति से अच्छा बर्ताव करने और उन्हें पुलिस से जोड़ने पर जोर दे रहे हैं तो दूसरी तरफ थाने का स्टाफ शिकायत लेकर आने वालों को इस तरह परेशान करते हैं कि वह दोबारा न आने की कसम खा लेता है।
हरि पुलिस की मनमानी का आलम यह है कि बलात घर में घुसकर हथियार से वार कर जेवरात छीनने वालों के खिलाफ सिर्फ मारपीट का मामला दर्ज होता है, जबकि यह लूटपाट का प्रकरण है। चोरी की रिपोर्ट से थाने की बदनामी होती है इसलिए रिपोर्ट न दर्ज हो इसकी पूरी कोशिश होती है।
कोई अड़ ही जाए तो उससे आवेदन लेकर पावती सौंप दी जाती है। वहीं हरि टीआई ऐसे आरोपों को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि मामलों में किसी तरह का पेंच फंसा होता है, जिसके कारण ऐसा होता है।
डीबी स्टार को हरि पुलिस की ओर से की जा रही अनियमितताओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
इन्हीं में से एक शिकायत थी सरगांव के मालिकराम साहू की। मालिकराम के खेत खपरी रोड में है। खेत में ही उसने घर भी बना रखा है। 3 मई की रात करीब साढ़े 8 बजे वह घर में खाना खा रहा था। किसी ने बाहर से आवाज दी। मालिकराम की पत्नी शबाना ने दरवाजा खोला।
तीन युवक घर में घुस आए और पति-पत्नी पर टूट पड़े। उनके हाथ में हंसिया, पेचकस और चाकू था। उन्होंने मालिकराम पर हंसिया और चाकू से वार किया और पत्नी को बुरी तरह से पीटा। उन्हें लहूलुहान कर युवकों ने घर की तलाशी ली। पत्नी के शरीर से जेवरात उतार लिए और पेटी तोड़कर दो हजार रुपए निकाले।
घर में मालिकराम का मंदबुद्धि बेटा भी था, जिसे आरोपियों ने बख्श दिया। लूटपाट के बाद आरोपी घर को बाहर से बंद कर फरार हो गए। घायल मालिकराम ने मोबाइल से फोन कर पड़ोसी को सूचना देकर बुलाया। एक घंटे के भीतर घायल पति-पत्नी हरि थाने पहुंचे। टीआई इशहाक खलखो ने रोजनामचा में शिकायत दर्ज कराई।
उन्हें मुलाहिजा के लिए बिल्हा भेजा गया, जहां गंभीर चोटों को देखकर डॉक्टर ने जिला अस्पताल रिफर कर दिया। वारदात को हुए एक घंटा भी नहीं बीता था लेकिन आरोपियों की घेराबंदी के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। 3 मई की रात से 6 मई की सुबह तक मालिकराम जिला अस्पताल में भर्ती रहा।
अगले दिन 4 मई को मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई। तीन आरोपियों के खिलाफ धारा 294, 506, 323, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया गया। मालिकराम की पत्नी के जेवरात आरोपी निकाल कर ले गए थे, जो कि लूटपाट का मामला है।
इसके बाद भी लूट की बात एफआईआर में नहीं लिखी गई। इस तरह लूटपाट जैसे गंभीर अपराध को छिपाकर मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित कर दिया गया है। उसने जब एसपी से शिकायत करने की बात कही तो पुलिस वालों ने उसे रोक दिया और मामला जल्द निपटाने का आश्वासन दिया।
प्रार्थी अस्पताल में, फिर भी हो गई एफआईआर
हरि पुलिस ने घायल मालिकराम के अस्पताल से छुट्टी होने का भी इंतजार नहीं किया। वारदात के अगले दिन सुबह 4 मई को दोपहर 12 बजे के आसपास थाने का मुंशी जिला अस्पताल पहुंचा। मालिकराम से बातचीत की और कागजों में दस्तखत करा लिए गए।
वास्तव में यह एफआईआर की कॉपी थी। मालिकराम के दस्तखत के बाद पुलिस ने अपनी ओर से एफआईआर में वारदात की घटना लिख ली। मामले में मारपीट का मामला दर्ज किया गया, जबकि इसमें लूट की घटना भी शामिल थी। प्रक्रिया के तहत अस्पताल में भर्ती होने के कारण मालिकराम का सिर्फ बयान लिया जाना था।
इसके आधार पर एफआईआर होती। वहीं थाने में मौजूद एफआईआर में मालिकराम के दस्तखत हैं। इसका मतलब कि वह थाने पहुंचा था। हकीकत यह है कि वह अगले दिन अस्पताल में था। ऐसी सूरत में किसी भी स्थिति में वह एफआईआर में दस्तखत कराने थाने नहीं पहुंच सकता था। पुलिस की सारी कारगुजारी सिर्फ इसलिए है ताकि किसी भी सूरत में लूटपाट की बात सामने न आ सके।
आजीवन कारावास का प्रावधान
लूट व डकैती की वारदात गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। किसी भी थाना क्षेत्र में इस तरह की वारदात वहां की पुलिस व्यवस्था में भारी चूक को साबित करती है। इस प्रकरण में भी पत्नी के जेवरात जबरदस्ती उतरवा कर आरोपियों द्वारा ले जाना पाया गया है जो कि लूट का मामला है। ऐसे प्रकरण में अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
टीआई के आदेश पर होता है जुर्म दर्ज
हरि थाने में कोई बड़े से बड़ा या छोटे से छोटा प्रकरण भी लेकर जाए तो फौरन एफआईआर नहीं होती है। थाने के स्टाफ को टीआई की ओर से सख्त निर्देश हैं कि उनके आदेश के बिना किसी मामले में एफआईआर न लिए जाए। पहले प्रकरण टीआई तक पहुंचता है इसके बाद उनके निर्देश पर ही प्रकरण दर्ज होता है। यही कारण है कि बहुत से मामलों में पावती थमाई जाती है या मामले को ही पेंडिंग कर दिया जाता है।
हरि पुलिस की मनमानी का आलम यह है कि बलात घर में घुसकर हथियार से वार कर जेवरात छीनने वालों के खिलाफ सिर्फ मारपीट का मामला दर्ज होता है, जबकि यह लूटपाट का प्रकरण है। चोरी की रिपोर्ट से थाने की बदनामी होती है इसलिए रिपोर्ट न दर्ज हो इसकी पूरी कोशिश होती है।
कोई अड़ ही जाए तो उससे आवेदन लेकर पावती सौंप दी जाती है। वहीं हरि टीआई ऐसे आरोपों को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि मामलों में किसी तरह का पेंच फंसा होता है, जिसके कारण ऐसा होता है।
डीबी स्टार को हरि पुलिस की ओर से की जा रही अनियमितताओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
इन्हीं में से एक शिकायत थी सरगांव के मालिकराम साहू की। मालिकराम के खेत खपरी रोड में है। खेत में ही उसने घर भी बना रखा है। 3 मई की रात करीब साढ़े 8 बजे वह घर में खाना खा रहा था। किसी ने बाहर से आवाज दी। मालिकराम की पत्नी शबाना ने दरवाजा खोला।
तीन युवक घर में घुस आए और पति-पत्नी पर टूट पड़े। उनके हाथ में हंसिया, पेचकस और चाकू था। उन्होंने मालिकराम पर हंसिया और चाकू से वार किया और पत्नी को बुरी तरह से पीटा। उन्हें लहूलुहान कर युवकों ने घर की तलाशी ली। पत्नी के शरीर से जेवरात उतार लिए और पेटी तोड़कर दो हजार रुपए निकाले।
घर में मालिकराम का मंदबुद्धि बेटा भी था, जिसे आरोपियों ने बख्श दिया। लूटपाट के बाद आरोपी घर को बाहर से बंद कर फरार हो गए। घायल मालिकराम ने मोबाइल से फोन कर पड़ोसी को सूचना देकर बुलाया। एक घंटे के भीतर घायल पति-पत्नी हरि थाने पहुंचे। टीआई इशहाक खलखो ने रोजनामचा में शिकायत दर्ज कराई।
उन्हें मुलाहिजा के लिए बिल्हा भेजा गया, जहां गंभीर चोटों को देखकर डॉक्टर ने जिला अस्पताल रिफर कर दिया। वारदात को हुए एक घंटा भी नहीं बीता था लेकिन आरोपियों की घेराबंदी के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। 3 मई की रात से 6 मई की सुबह तक मालिकराम जिला अस्पताल में भर्ती रहा।
अगले दिन 4 मई को मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई। तीन आरोपियों के खिलाफ धारा 294, 506, 323, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया गया। मालिकराम की पत्नी के जेवरात आरोपी निकाल कर ले गए थे, जो कि लूटपाट का मामला है।
इसके बाद भी लूट की बात एफआईआर में नहीं लिखी गई। इस तरह लूटपाट जैसे गंभीर अपराध को छिपाकर मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित कर दिया गया है। उसने जब एसपी से शिकायत करने की बात कही तो पुलिस वालों ने उसे रोक दिया और मामला जल्द निपटाने का आश्वासन दिया।
प्रार्थी अस्पताल में, फिर भी हो गई एफआईआर
हरि पुलिस ने घायल मालिकराम के अस्पताल से छुट्टी होने का भी इंतजार नहीं किया। वारदात के अगले दिन सुबह 4 मई को दोपहर 12 बजे के आसपास थाने का मुंशी जिला अस्पताल पहुंचा। मालिकराम से बातचीत की और कागजों में दस्तखत करा लिए गए।
वास्तव में यह एफआईआर की कॉपी थी। मालिकराम के दस्तखत के बाद पुलिस ने अपनी ओर से एफआईआर में वारदात की घटना लिख ली। मामले में मारपीट का मामला दर्ज किया गया, जबकि इसमें लूट की घटना भी शामिल थी। प्रक्रिया के तहत अस्पताल में भर्ती होने के कारण मालिकराम का सिर्फ बयान लिया जाना था।
इसके आधार पर एफआईआर होती। वहीं थाने में मौजूद एफआईआर में मालिकराम के दस्तखत हैं। इसका मतलब कि वह थाने पहुंचा था। हकीकत यह है कि वह अगले दिन अस्पताल में था। ऐसी सूरत में किसी भी स्थिति में वह एफआईआर में दस्तखत कराने थाने नहीं पहुंच सकता था। पुलिस की सारी कारगुजारी सिर्फ इसलिए है ताकि किसी भी सूरत में लूटपाट की बात सामने न आ सके।
आजीवन कारावास का प्रावधान
लूट व डकैती की वारदात गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। किसी भी थाना क्षेत्र में इस तरह की वारदात वहां की पुलिस व्यवस्था में भारी चूक को साबित करती है। इस प्रकरण में भी पत्नी के जेवरात जबरदस्ती उतरवा कर आरोपियों द्वारा ले जाना पाया गया है जो कि लूट का मामला है। ऐसे प्रकरण में अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
टीआई के आदेश पर होता है जुर्म दर्ज
हरि थाने में कोई बड़े से बड़ा या छोटे से छोटा प्रकरण भी लेकर जाए तो फौरन एफआईआर नहीं होती है। थाने के स्टाफ को टीआई की ओर से सख्त निर्देश हैं कि उनके आदेश के बिना किसी मामले में एफआईआर न लिए जाए। पहले प्रकरण टीआई तक पहुंचता है इसके बाद उनके निर्देश पर ही प्रकरण दर्ज होता है। यही कारण है कि बहुत से मामलों में पावती थमाई जाती है या मामले को ही पेंडिंग कर दिया जाता है।
CG Police : वायरलेस पर रहे एसपी साहब
बिलासपुर.तालापारा में एक युवक को रविवार रात कुछ युवकों ने लाठी, रॉड से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के बाद तालापारा में माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालात को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हत्या से आक्रोशित लोगों ने आरोपियों के घर पर पथराव किया।
इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी। देर रात तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। हत्या की वजह आपसी रंजिश को बताया जा रहा है।
तालापारा में दो पक्षों में लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। रविवार को पीपल चौक के पास रहने वाले इमरान उर्फ बाबा का यहीं के हरीश चेलकर व मनीष चेलकर से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था।
रात को मोहम्मद अनीश, अब्दुल तौकीब और रज्जाक दोनों पक्षों में समझौता कराने गए, लेकिन बात नहीं बनी और दोनों पक्ष फिर से उलझ गए। इसके बाद हरीश चेलकर व मनीष चेलकर ने अपने साथियों के साथ मिलकर मो. अनीश पर टांगी, रॉड से हमला कर दिया।
इससे अनीश के सिर पर गंभीर चोंटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी भाग निकले। इधर, अनीश की मौत की खबर मिलते ही उसके परिजन व मोहल्लेवाले आक्रोशित हो गए।
कुछ ही देर में घटनास्थल पर भीड़ जुट गई और संदेहियों के घरों मंे पथराव व तोड़फोड़ शुरू कर दी। सूचना मिलने पर सिविल लाइन टीआई सीएल सिंह व जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को सिम्स भेज दिया।
देर रात तक रहा तनाव
घटना को लेकर देर रात तक पीपल चौक व आसपास तनाव की स्थिति बनी रही। इसे देखते हुए यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
सिविल लाइन थाने में देर रात तक किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी और न ही इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी थी। बताया गया कि अनीश के खिलाफ मारपीट, बलवा सहित करीब एक दर्जन से अधिक मामले सिविल लाइन थाने में दर्ज हैं।
नहीं रहा पुलिसका खौफ
शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं की एक वजह पुलिस का घटता खौफ है। पुलिस और जेल के नाम से बना खौफ अब कम होता जा रहा है। यही वजह है कि आए दिन हत्या, लूट जैसी वारदातों में इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि अब कानून का खौफ नहीं रहा।
थानों में पुलिस की कार्यप्रणाली से भी अपराध को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं पैसे के बल पर जेल में मिलने वाली सुविधाएं भी इसकी वजह है।
आईजी ने एक माह पहले बिलासपुर रेंज के चारों एसपी की बैठक ली थी और अपहरण व हत्या के मामले में चिंता जताते हुए कार्ययोजना बनाने व ऐसी वारदातों पर काबू पाने पर जोर दिया था। उन्होंने ब्लाइंड मर्डर के मामलों में असफलता पर अफसरों को आड़े हाथों लिया था।
लाठियों से काबू
हत्या के बाद आक्रोशित लोगों ने आरोपियों के घर जाकर तोड़फोड़ करने की कोशिश की। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठियां चलाईं। किसी तरह उपद्रवियों को खदेड़ा गया।
वायरलेस पर रहे एसपी
अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एसपी अजय यादव पूरे घटनाक्रम के दौरान वायरलेस के जरिए पुलिस अधिकारियों के संपर्क में रहे। वे वायरलेस व फोन पर घटना की जानकारी लेते रहे और अफसरों को निर्देश देते रहे।
वारदातें अनसुलझी
जनवरी से अब तक शहर में ही करीब 20 से अधिक हत्याएं हो चुकीं। सुशील पाठक हत्याकांड समेत इनमें से एक तिहाई मामलांे का पुलिस को सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस के लिए ये मामले चुनौती बन चुके हैं।
इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी। देर रात तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। हत्या की वजह आपसी रंजिश को बताया जा रहा है।
तालापारा में दो पक्षों में लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। रविवार को पीपल चौक के पास रहने वाले इमरान उर्फ बाबा का यहीं के हरीश चेलकर व मनीष चेलकर से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था।
रात को मोहम्मद अनीश, अब्दुल तौकीब और रज्जाक दोनों पक्षों में समझौता कराने गए, लेकिन बात नहीं बनी और दोनों पक्ष फिर से उलझ गए। इसके बाद हरीश चेलकर व मनीष चेलकर ने अपने साथियों के साथ मिलकर मो. अनीश पर टांगी, रॉड से हमला कर दिया।
इससे अनीश के सिर पर गंभीर चोंटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी भाग निकले। इधर, अनीश की मौत की खबर मिलते ही उसके परिजन व मोहल्लेवाले आक्रोशित हो गए।
कुछ ही देर में घटनास्थल पर भीड़ जुट गई और संदेहियों के घरों मंे पथराव व तोड़फोड़ शुरू कर दी। सूचना मिलने पर सिविल लाइन टीआई सीएल सिंह व जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को सिम्स भेज दिया।
देर रात तक रहा तनाव
घटना को लेकर देर रात तक पीपल चौक व आसपास तनाव की स्थिति बनी रही। इसे देखते हुए यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
सिविल लाइन थाने में देर रात तक किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी और न ही इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी थी। बताया गया कि अनीश के खिलाफ मारपीट, बलवा सहित करीब एक दर्जन से अधिक मामले सिविल लाइन थाने में दर्ज हैं।
नहीं रहा पुलिसका खौफ
शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं की एक वजह पुलिस का घटता खौफ है। पुलिस और जेल के नाम से बना खौफ अब कम होता जा रहा है। यही वजह है कि आए दिन हत्या, लूट जैसी वारदातों में इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि अब कानून का खौफ नहीं रहा।
थानों में पुलिस की कार्यप्रणाली से भी अपराध को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं पैसे के बल पर जेल में मिलने वाली सुविधाएं भी इसकी वजह है।
आईजी ने एक माह पहले बिलासपुर रेंज के चारों एसपी की बैठक ली थी और अपहरण व हत्या के मामले में चिंता जताते हुए कार्ययोजना बनाने व ऐसी वारदातों पर काबू पाने पर जोर दिया था। उन्होंने ब्लाइंड मर्डर के मामलों में असफलता पर अफसरों को आड़े हाथों लिया था।
लाठियों से काबू
हत्या के बाद आक्रोशित लोगों ने आरोपियों के घर जाकर तोड़फोड़ करने की कोशिश की। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठियां चलाईं। किसी तरह उपद्रवियों को खदेड़ा गया।
वायरलेस पर रहे एसपी
अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एसपी अजय यादव पूरे घटनाक्रम के दौरान वायरलेस के जरिए पुलिस अधिकारियों के संपर्क में रहे। वे वायरलेस व फोन पर घटना की जानकारी लेते रहे और अफसरों को निर्देश देते रहे।
वारदातें अनसुलझी
जनवरी से अब तक शहर में ही करीब 20 से अधिक हत्याएं हो चुकीं। सुशील पाठक हत्याकांड समेत इनमें से एक तिहाई मामलांे का पुलिस को सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस के लिए ये मामले चुनौती बन चुके हैं।
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