Friday, August 5, 2011

Mumbai Police : 14 घंटे इंतजार करती रही मुंबई पुलिस

मुंबई । देश में खुफिया तंत्र की नाकामी और सूचना मिलने पर उसकी वास्तविकता पता लगाने की क्षमता किस कदर कमजोर है इसका एक उदाहरण देखिए। दरअसल मुंबई पुलिस मछुआरों से मिली सूचना पर लगातार 14 घंटे तक समुद्र की निगरानी करती रही लेकिन उसे कुछ भी हाथ नहीं लगा।


दरअसल मछुआरों ने पुलिस को सूचना की दी कि कुछ विदेशी शिप भारतीय सीमा में बिना इजाजत दखल दे रहे हैं। जिसके बाद मुंबई पुलिस लगातार 14 घंटों तक शिप की तलाशी के लिए इंजतार करती रही। नियमों के अनुसार संदिग्ध सूचना मिलने पर पुलिस को तुरंत ही कोस्ट गार्ड को सूचित करना चाहिए था लेकिन उसने ऎसा नहीं किया। ठीक एक दिन बाद पुलिस ने जब कोस्ट गार्ड को सूचना दी तो पता चला कि वर्सोवा बीच पर एमवी पवित शिप फंसा हुआ है। जिसकी संदिग्ध सवचना मछुआरों ने पुलिस को दी थी।

Rajasthan Police : पुलिस ने समझा दिया अपनी स्टाइल में, पोस्टर चिपकाया तो जाओगे जेल

चित्तौडग़ढ़। नगरपालिका की सम्पत्ति एवं सरकारी सम्पत्ति पर पोस्टर एवं पेम्पलेट चिपकाने तथा अवैध रूप से विज्ञापन लिखने वालों के खिलाफ नगरपालिका ने दो प्रमुख फर्नीचर व्यवसायियों के साथ ही चार जनों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवा इस तरह का कृत्य करने वालों के खिलाफ हड़कम्प सा मचा दिया है।
पालिका आयुक्त दिलीप गुप्ता के अनुसार, नगरपालिका की एवं सरकारी सम्पत्ति पर पोस्टर एवं पेम्पलेट चिपकाने के साथ ही अवैध रूप से विज्ञापन लिखने वालों को जगह-जगह सावचेत करने एवं चेतावनी देने के बावजूद प्रमुख दिवारों पर अवैध रूप से प्रचार कर नगर की सुन्दरता को भी नष्ट किया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि इस तरह सरकारी सम्पत्ति पर अवैध रूप से अपनी दुकान आदि का प्रचार करने पर नगर के प्रमुख फर्नीचर व्यवसायी जे.पी. फर्नीचर के प्रो. जय प्रकाश, बालाजी फर्नीचर के गोपाल लाल मून्दड़ा, विद्यार्थी परिषद् के संयोजक अशोक रायका एवं एसटेक के व्यवस्थापक गोपाल लाल शर्मा के खिलाफ पुलिस कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है।
विद्यार्थी परिषद् द्वारा गत दिनों आयोजित एक रैली को लेकर कई स्थानों पर पोस्टर लगाए गए थे। आयुक्त के अनुसार, पालिका एवं सरकारी सम्पत्ति पर किसी भी व्यक्ति द्वारा इस तरह की कार्यवाही की गई तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
इधर उन्होंने बताया कि नगरपालिका के अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा बुधवार को नगर के विभिन्न क्षैत्रों में ५८ दुकानों की तलाशी ली जाकर २५ किलो प्लास्टिक कैरी बेग एवं एक कार्टून पाउच का भी जप्त किया गया।

UP Police : दरोगा बाबू की दौड़ में अचेत हुए पुलिसवाले

लखनऊ /सीतापुर ! उत्तर प्रदेश में चल रही पुलिस रैंकर भर्ती के दौरान दौडते समय आज तीन और पुलिसकर्मी बेहोश हो गये जबकि दो अगस्त को बेहोश हुए एक पुलिसकर्मी की लखनऊ के ट्रामा सेंटर में मृत्यु हो गयी 1
राज्य के पुलिस महानिरीक्षक .अपराध. जी.पी. शर्मा ने आज लखनऊ में संवाददाताओं को बताया कि पुलिस लाइन में उपनिरीक्षक रैंकर भर्ती के लिए चयनित अभ्यर्थियों की करायी जा रही दौड के दौरान बेहोश हुए एक पुलिसकर्मी घनश्याम की उपचार के दौरान आज लखनऊ के ट्रामा सेंटर में मृत्यु हो गयी 1 वह लखनऊ के मलिहाबाद थाने की रहीमाबाद चौकी में तैनात था1


उन्होंने बताया कि दो अगस्त को सीतापुर में दौडते समय आठ पुलिसकर्मी बेहोश हो गये थे 1 तीन को गंभीर हालत में लखनऊ के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था जहां उपचार के दौरान अम्बेडकरनगर निवासी घनश्याम की मृत्यु हो गयी 1
सीतापुर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार दौडते समय आज भी तीन पुलिसकर्मी बहोश हो गये 1 तीनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है 1
गौरतलब है कि राज्य के 18 जिलों में चल रही रैंकर पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती के दौरान अब तक करीब 100 पुलिसकर्मी दौडते समय बेहोश गये थे 1 अब तक चार पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है 1

Rajasthan Police : 125 ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त और निलंबित

आरटीओ ने किया छह माह लिए 125 ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त और निलंबित

जयपुर। लापरवाही और शराब के नशे में वाहन चलाने वालों के लिए यातायात पुलिस अब सख्त हो गई है। अब ऐसे लोगों को यातायात पुलिस पहले तो चालान करेगी। इसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त के लिए आरटीओ को भेजेगी। आरटीओ ऑफिस संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुनेगा। इसके बाद लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया अपनाएगा।
यातायात पुलिस ने पिछले तीन माह में ऐसे 125 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त और निलंबित करने के लिए आरटीओ को पत्र लिखा है। जिसमें ज्यादातर वे वाहन चालक है जो शराब के नशे में या लापरवाही से वाहन चला रहे थे।
आरटीओ डॉ. बी.एल. जाटावत ने बताया कि इन लाइसेंस धारकों को जवाब के लिए नोटिस जारी कर दिए है। इन्हें जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। अगर इस अवधि में जवाब नहीं आया तो निलंबित करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके बाद निलंबित लाइसेंस की जानकारी सभी आरटीओ ऑफिस में भेजी जाएगी। ताकि इस बीच अन्य ऑफिस में निलंबित लाइसेंस धारक लाइसेंस नहीं बनावा सकें।
डीटीओ राजेंद्र गहलोत ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम1988 की धारा 19 (1)/(एफ) के तहत एक दिन से 6 माह तक के लिए लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। इस दौरान लाइसेंस धारक से वाहन चलाता समय अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा

Delhi Police : दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ी 'इंडियन ऑयडल' चोरनी

दिल्ली। पुलिस ने गर्ल्स पीजी को निशाना बनानेवाली एक युवती को पकड़ा है। उजाला (20) गर्ल्स पीजी से एटीएम कार्ड्स, क्रेडिट कार्ड्स, डेबिट कार्ड्स और हैंडी सामानों को निशाना बनाती थी। पुलिस ने आरोपी युवती उजाला को गिरफ्तार कर मोबाइल, लैपटॉप, ज्वेलरी व अन्य सामान बरामद किया है। उजाला दोस्त आरती के साथ वारदात करती थी। पुलिस आरती की तलाश में छापेमारी कर रही है। कोटला मुबारकपुर पुलिस से अपेक्षा कंडेलवाल ने क्रेडिट और डेविट कार्ड चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने गुड़गांव से उजाला (20) को गिरफ्तार किया है। उजाला ने बताया कि आरती के साथ गर्ल्स पीजी को निशाना बनाती थी। उजाला इंडियन आइडोल में भी किस्मत आजमा चुकी है।


पेइंग गेस्ट हाउस में रहने महिलाओं के क्रेडिट कार्ड चुराने वाली एक युवती को दक्षिण जिला पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गुड़गांव निवासी यह युवती खुद गेस्ट हाउस में रहने की बात कहते हुए, पहले वहां रहने वाली महिलाओं व युवतियों से दोस्ती करती और मौका पाते ही उनके क्रेडिट कार्ड चुरा लेती थी। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी के क्रेडिट कार्ड से खरीदे गए महंगे मोबाइल फोन, लैपटॉप, ज्वैलरी आदि बरामद की है। साउथ एक्स पार्ट वन स्थित पेइंग गेस्ट हाउस में रहने वाली अपेक्षा खंडेलवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके कमरे से पर्स व एटीएम कार्ड गायब हो गया है।

जब तक बैंक से एटीएम कार्ड बंद कराया गया, तब तक कार्ड से 30 हजार की खरीददारी हो चुकी थी। इस तरह के कई अन्य मामले भी पुलिस की जानकारी में आ थे। पुलिस की टीम जांच में पता लगाया कि चोरी हुए एटीएम कार्ड से साउथ एक्स स्थित दो स्टोर से मोबाइल फोन व अन्य सामान खरीदा गया था। वहां लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई तो उसमें एक युवती भी नजर आ रही थी। चोरी के कार्ड से खरीदे गए मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाया गया, जिसके आधार पर टीम ने गुड़गांव के डूंडेहेड़ा गांव से उजाला उर्फ स्नेहा को हिरासत में ले लिया।


उजाला ने बताया कि वह आरती नामक सहेली के साथ मिलकर क्रेडिट कार्ड चुराया करती थी। आरती से उसका परिचय बस में हुआ था। उजाला पूर्व में किसी मॉल में नौकरी करती थी, लेकिन चोरी का चस्का लगने पर नौकरी छोड़ दी। उसका परिवार गुड़गांव में ही रहता है। पुलिस के अनुसार उजाला व आरती साउथ एक्स, गौतम नगर, सत्यनिकेतन आदि ऐसे स्थानों पर जाती थीं जहां पेइंग गेस्ट हाउस में युवतियां रहती थीं। गेस्ट हाउस में रहने की इच्छा जताते हुए दोनों वहां रहने वाली युवतियों से दोस्ती करती और मौका पाते हुए उनका पर्स व एटीएम चुरा लेती थीं। दोनों को पता था कि एटीएम कार्ड न मिलने पर युवतियां बैंक से कार्ड को बंद करा देंगी, लिहाजा वे जल्द से जल्द पास के किसी बाजार में जाकर कार्ड से खरीददारी कर लेती थीं।

Delhi Police : “सुस्त” दिल्ली पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

दिल्ली पुलिस को देश की सर्वोच्च अदालत ने “वोट फॉर कैश” मामले में सुस्ती दिखाने पर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि जांच में मुस्तैदी दिखाई जाए और पुलिस यह बताए कि सांसदों को दी गई रकम कहां से आई। जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने और अंतिम रिपोर्ट देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तीन हफ्ते की मोहलत दी है। जस्टिस आफताब आलम और आर.एम लोढ़ा की बेंच ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि एक मामूली से बिचौलिए को संसद की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने की छूट दी गई। बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा, ' आप आधे अधूरे मन से कार्रवाई कर रहे हैं। आपको इस मामले में तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। ' गौरतलब है कि 2008 के नोट फॉर वोट मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में कोई नेता शामिल नहीं है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जांच रिपोर्ट देने के लिए 40 दिन की मोहलत मांगी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए 3 हफ्ते के भीतर उसे फाइन रिपोर्ट देने को कहा है। शीर्ष अदालत ने यह उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस इस मामले में सही और निष्पक्ष जांच करेगी।


दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को वोट के बदले नोट केस में जांच की स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी। इसमें उसने सुहैल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना को गिरफ्तार किए जाने के अलावा अमर सिंह, रेवती रमण और अशोक अर्गल से पूछताछ की जानकारी दी थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने यह भी कहा था कि जांच से इसमें किसी नेता के शामिल होने के सबूत नहीं मिल रहे हैं। दिल्ली पुलिस पहले भी कह चुकी है कि अमर सिंह या रेवती रमण ने बीजेपी सांसदों को रकम देने के लिए सुहैल हिंदुस्तानी से संपर्क नहीं किया था।

गौरतलब है कि बीजेपी सांसदों को घूस दिए जाने की कोशिश के तीन साल पुराने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कोई खास कार्रवाई तक नहीं की थी। 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली पुलिस से तेजी से जांच करने का निर्देश दिया था।

UP Police : प्रमोशन के लिए कोर्ट के फैसले का इंतजार

प्रदेश में इन दिनों पुलिस अधिकारियों का टोटा पड़ गया है। प्रदेश में एसपी के 83 पद महीनों से खाली चल रहे हैं, और कुछ तो सालों से खाली हैं। जिनके लिए सरकार को अधिकारी खोजे नहीं मिल रहे हैं। 1996 बैच के कई आईपीएस अधिकारियों की डीपीसी होनी अभी बाकी है जबकि अन्य राज्यों में 96 बैच के अधिकारियों को डीपीसी मिल चुकी है लेकिन यहां दिक्कत यह है कि 96 बैच के पुलिस अधिकारियों को डीआईजी के लिए प्रमोट कर दिया गया तो एसपी के 12 पद और खाली हो जाएंगे, तब यह संख्या 83 से बढ़कर 95 हो जाएगी। अब इन सभी अधिकारियों को इंतजार है देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का। दरअसल ये सारा विवाद 2008 में बनाई गई प्रदेश सरकार की नई नियमावली 8A से पैदा हुआ है। इस नियमावली के तहत प्रमोशन को आरक्षण देने के लिए परिणामी ज्येष्ठता सूची जारी की गई। इस नियमावली ने आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को प्रमोशन के मामले में अपने बैच में नंबर-1 की पोजीशन पर पहुंचा दिया। आपको बता दें कि इस नियमावली के आने से पहले अधिकारियों की सीनियारिटी कमीशन के आधार पर तय होती थी, इसमें अगर किसी बैच में प्रमोशन के लिए 5 पद हैं तो पहले 4 जनरल और फिर एक आरक्षित वर्ग के अधिकारी को दिया जाता था लेकिन नियमावली 8A के आने के बाद यह सीनियारिटी परिणामी ज्येष्ठता सूची के आधार पर तय की जाने लगी। इस व्यवस्था ने प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी तरह से पलट दिया। अब प्रमोशन में पहले आरक्षित वर्ग के अधिकारी को वरीयता दी जाएग, इसके बाद जनरल वर्ग को। इस नियमावली का प्रभाव प्रांतीय पुलिस सेवा के वर्ष 82, 83 और 84 बैच तक तो कम नजर आया लेकिन इसके बाद 85 बैच से इस नियमावली की खामियां तेजी से सामने आने लगी। जिसके बाद पीपीएस कैडर का 1990 बैच का अधिकारी 1986 में आ गया और 1994 बैच का अधिकारी 1989 में आ गया। आलम ये हुआ कि कई जिलों में एसपी सिटी, सीओ सिटी से भी जूनियर हो गया।

प्रमोशन में आरक्षण का ये मामला केवल पीपीएस अधिकारियों को ही प्रभावित नहीं कर रहा है। बल्कि उत्तर प्रदेश के सभी विभागों के हजारों अधिकारी व कर्मचारी इस नियमावली से प्रभावित हैं और अपने प्रमोशन की बाट जोह रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सिंचाई विभाग के एक इंजीनियर ने इस नियमावली के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक रिट दायर की। जिसके बाद 4 जनवरी 2011 को जस्टिस प्रदीप कांत की फुल बेंच ने इस परिणामी ज्येष्ठता सूची को निरस्त करने का फैसला सुनाया। साथ ही नई नियमावली के तहत प्रमोट हुए अधिकारियों को डिमोट करने का भी फरमान जारी किया। हाईकोर्ट के इस फैसले को आरक्षण पाकर प्रमोट हुए अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे डाली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोन्नत अधिकारियों के डिमोशन संबंधी आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए बाकी फैसले पर स्टे कर दिया। तब से यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है। प्रदेश के हजारों अधिकारियों, कर्मचारी अब अपने प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं।